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मजिस्ट्रेट ने अकाउंट में डाले 20 लाख रूपये, नही टलने दी गरीब लडकी की शादी और बचाई इज्जत

एक पिता के लिए उसकी बेटी का कन्यादान करना सबसे बड़ा पूण्य माना जाता है. बेटी की शादी के लिए पिता पूरी जिन्दगी जमा पूंजी लगाता है रहता है फिर उसकी विदाई करता है. ऐसा ही एक पिता ने भी किया. जिसे सरकारी मुआवजा मिलना था अब सरकारी काम में कित्न्ना ज्यादा समय लगता है ये बात तो आप लोग जानते ही है.

पिता ने सोचा कि उसकी बेटी की शादी तक उसे पैसे मिल जायेंगे लेकिन ऐसा नही हुआ. उसका काम सरकारी दफ्तर में रुका हुआ था. बेटी की शादी का दिन आने वाला था और पिता के पास पैसो की कमी थी. पिता की हालत देखकर बेटी काफी दुखी हुई और उसने सिटी मजिस्ट्रेट को मैसेज किया.

लडकी का नाम आरती है जोकि उतर प्रदेश की रहने वाली है. आरती ने लिखा मुआवजा न मिलने की वजह से उसकी शादी रुक जाएगी और उसके पिता की इज्जत चली जाएगी. अभी तक न मेहमानों के सत्कार से लेकर आभुषण और अन्य जरुरी समानो की व्यवस्थान ही हो पाई है. जमीन का मुआवजा नही मिला है और सरकारी दफ्तर में फंसा हुआ है. मेरे पिता की इज्जत का सवाल है अब आप ही हमारी इज्जत बचा सकते है.

मजिस्ट्रेट ने जब आरती का मैसेज पढ़ा तो पूरा सरकारी सिस्टम पिघल गया एक लडकी की शादी इस वजह से रुक जाएगी क्योंकि सरकारी कर्मचारियों ने अपना काम समय पर नही किया था. आरती के एक मैसेज को पढकर मजिस्ट्रेट ने ऐसी फुर्ती दिखाई कि हर कोई हैरान रह गया. खुद सिटी मजिस्ट्रेट ने फौरन ऑपचारिक्ताएं पूरी करवाई. जिस दिन उन्हें मैसेज मिला उसी दिन 3 बजे तक आरती के पिता के खाते में 20 लाख रूपये डाल दिए गये थे.

20 लाख आते ही किया मजिस्ट्रेट का धन्यवाद

आरती के पिता को जब 20 लाख रूपये का मैसेज आया तो उन्होंने आरती से बात की. ये बात जानकर आरती बहुत खुश हुई और उसने तुंरत मजिस्ट्रेट को मैसेज कर उनका धन्यवाद किया और कहा शादी बचाने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! इसके बाद आरती के पिता ने राहत की साँस ली क्योंकि उन्हें बेटी की शादी की टेंशन नही रही.

वहीँ मजिस्ट्रेट के काम की हर कोई तारीफ कर रहा है. सिटी मजिस्ट्रेट ने एक बेटी की फरियाद सुनकर तुंरत एक्शन लिया और 5 घंटे में ही आरती की सारी समस्या हल कर दी.

आरती अगर मजिस्ट्रेट से बात नही करती तो उसका काम कभी पूरा नही हो पाता. सरकारी काम करवाने के लिए हमे कितनी भागदौड करनी पडती है ये बात हर कोई जानता है. व्यक्ति सरकारी दफ्तर जाता है लेकिन ऐसा कभी नही हुआ कि उसका काम फौरन हो जाये. उसकी समस्या का हल कब निकलेगा इस बात का उसे पता नही होता है.

लेकिन सभी कर्मचारी एक जैसे नही होते है ये बात खुद उत्तर प्रदेश के सिटी मजिस्ट्रेट ने साबित कर दी है. कुछ उनकी तरह भी होते है जो अपने काम और मानवता की वजह से लगो का दिल जीत लेते है.

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