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गोबर से पैसा बना रही भारतीय टेक्नोलॉजी अगले छह महीने में 500 गोबर पेंट फैक्टरी होगी तैयार

गोबर से बनी गैस और फ़र्टिलाइज़र के बाद अब तैयार हो जाइए। गोबर से बने पेंट से अपने घरों को रंगने के लिए यह कोई मजाक नहीं है बल्कि केवीआइसी कि वह सीरियस प्लानिंग है जिसके अंतर्गत पूरे भारत में अगले छह महीनों के अंदर 500 ऐसे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई जाएंगी।

जहां मवेशियों के गोबर से बने पेंट का उत्पादन किया जाएगा। खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन यानी कि केवीआईसी के उठाये इस कदम से न केवल लगभग 6000 लोगों को रोजगार मिलेगा बल्कि किसान और मवेशी पालने वाले लोगों के लिए एक परमानेंट सोर्स ऑफ इनकम बन जाएगा। किसानों को फायदा पहुंचाने वाली इस स्कीम के गणित को बाद में समझाएंगे, लेकिन उससे पहले इस अनोखी आइडिया के बारे में जान लेते हैं। जो ना केवल आपको स्वस्थ रखेगी बल्कि भारत की पेंट मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में एक नई इनोवेशन के तौर पर उभरेगी मार्केट में मिलने वाले ज्यादातर केमिकल पेंट में वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड यानी कि वीओसी मौजूद रहते हैं।

यह voc धीरे-धीरे हवा में रिलीज होते रहते हैं। इनमें से कुछ खतरनाक voc अस्थमा एग्जाम और राइनाइटिस की वजह बनते हैं और कई सालों तक voc गैस में सांस लेने की वजह से लिवर सिस्टम और किडनी को नुकसान पहुंच सकता है और यहीं पर केवीआइसी ने एंट्री मारी है। केवीआईसी का काऊडंग पेंटन केवल voc के बिना आएगा बल्कि इको फ्रेंडली होने के अलावा मार्केट में बिकने वाले किसी भी पेन से कहीं ज्यादा सस्ता होगा। गाय के गोबर को साइंटिफिकली ट्रिप करके इस मर्चेंट पेंट को फ़िलहाल छोटे लेवल पर बनाया जा रहा है और इस पेंट को दो फोम से मार्केट में उतारा जाएगा।

डिस्टेंपर पेंट और प्लास्टिक मर्चेंट पेंट!! मार्केट में अवेलेबल किसी भी पेंट के मुकाबले यह डीआईए स्टैंडर्ड का होगा। एंटी बैक्टीरियल एंटी फंगल होने के अलावा यह washable वाटरप्रूफ और लोंग लास्टिंग होगा। मतलब आप दीवारों को पानी से न केवल धो पाएंगे बल्कि गोबर पेंट कई सालों तक आप की दीवारों पर टिका रहेगा। दो बहुत जरूरी बातें हैं जो शायद अभी आपके दिमाग में चल रही होंगी तो आपको बता दें कि यह पेंट बदबू रहित होगा और गर्मियों और सर्दियों में यह पेंट थर्मल इंसुलेटर की तरह काम करेगा। जो बाजार में उपलब्ध फिलहाल कोई भी एक्सपेंसिव पेंट नहीं कर सकता। मार्केट के रेस्पोंस को देखने के लिए शुरुआत में इस पेंट का प्रोडक्शन ट्रायल बेस पर किया जाएगा और अगर भारतीय मार्केट से अच्छा रिस्पांस मिला तो इसका प्रोडक्शन एक कमर्शियल लेवल पर किया जाएगा।

अब दोस्तों इससे किसानों को होने वाले फायदे के बारे में जान लेते हैं। केवीआइसी ₹5 प्रति किलो के हिसाब से गोबर को किसानों से खरीदेगी एक हेल्थी गाय दिन में 20 -25 किलो गोबर दे सकती है और इसलिए किसान एक गाय से दिन में सौ से ₹125 आसानी से कमा सकते हैं। इस बात के भी कोई जानकारी नहीं है कि गाय के गोबर से बने यह पेंट कितने कीमत में आएंगे और कहां से पेंट को खरीदा जा सकेगा। पर जैसा पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि भारतीय लोगों के अलावा अब कई देश के लोग ऑर्गेनिक चीजों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसलिए पेंट की बात भी नकारी नहीं जा सकती क्योंकि इनोवेशन अभी शुरुआती दौर में है।

इसलिए हो सकता है कि पेंट इंडस्ट्री में इनोवेशन एकदम नई कैटेगरी के प्रोडक्ट को जन्म दे इस पेंट को manufacture करने का रो मटेरियल यानि गोबर मवेशी पाली वाले लोग या तो डायरेक्टली पेंट बनाने वाली फैक्ट्री को तय दामों में बेच पाएंगे या फिर ऐसे लोग खुद ऐसी पेंट फैक्ट्री लगा पाएंगे और केवीआइसी उनके लिए ऐसी फैक्ट्री सेटअप करने में मदद भी करेगी। दोस्तों ये नया इनोवेटिव आइडिया को हम अपना पूरा सपोर्ट करते है और अगर आप भी इस मेड इन इंडिया आइडिया की सराहना और सपोर्ट करते हैं तो कम से कम में जय हिंद लिखे बिना मत जाइएगा और हमारी पोस्ट को लाइक जरूर कर दीजिएगा। धन्यवाद!

 

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