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इंटरनेशनल क्रांतिकारी राजा महेंद्र प्रताप सिंह क्यों गायब हुए जानिए पूरी कहानी

अद्भुद और अलबेले राजा थे महेंद्र प्रताप सिंह ,पश्चिमी up के हाथरस के राजा के तमाम किस्से मशहूर हे। उनका विवाह बलवीर कौर से हुआ था जो जिन्द रियासत के सिद्धू जाट परिवार की थीं। दो स्पेशल ट्रेनों से उन्कि बारात गयी थी जब भी राजा साहब ससुराल जाते थे तो उन्हें 100 तोपों की सलामी दी जाती थी

राजा महेंद्र प्रताप ने दिल खोल कर स्कूल और कॉलेज के लिए अपनी निजी जमीने दान की !! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखी ! जाट राजा महेंद्र सिंह यूनिवर्सिटी बनने के फैसले के बाद ही काफी चर्चा में हैं.आइए जानते हैं राजा महेंद्र प्रताप सिंह के बारे में इतिहास में क्या दर्ज है और अब कैसे याद किए जाएंगे.जाट राजा महेंद्र प्रताप सिंह से आज की पीढ़ी अनजान थी. अब उनके नाम पर अलीगढ़ में यूनिवर्सिटी बनने के ऐलान के साथ ही उन पर चर्चा होने लगी है. राजा महेंद्र प्रताप सिंह कौन थे, उनका जाट समाज के लिए क्या योगदान रहा है, पहले अलीगढ़ मुस्लिरम यूनिवर्सि टी का नाम उनके नाम पर करने की चर्चा क्यों हो . रही थी, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में उनका क्या योगदान था, ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब अब एक के बाद एक सामने आ रहे हैं.

बता दें कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हाथरस ज़िले के मुरसान रियासत के राजा थे. जाट परिवार से आने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह के व्यक्तिात्व की खासी पहचान रही है. उस जमाने में वो एक पढ़े-लिखे राजा होने के साथ साथ एक अच्छे लेखक और पत्रकार के तौर पर भी जाने गए। उन्हें भारत की पहली निर्वाचित सरकार के राष्ट्रपति के तौर पर भी पहचाना जाता है यही नहीं उनकी एक पहचान सर्वधर्म सदभाव रखने वाले लीडर की भी है राजा महेंद्र प्रताप सिंह के बारे में इतिहास में कई बातें दर्ज की जा चुकी हैं. मसलन जब पहला विश्वयुद्ध हो रहा था, उस दौरान एक दिसंबर, 1915 को उन्होंने अफगानिस्तान जाकर उन्होंने भारत की पहली निर्वाचित सरकार बनाई जिसमें वो स्वयं राष्ट्रपति थे. जब भारत में अंग्रेजी शासन था लेकिन ठीक वक्त एक स्वतंत्र भारतीय सरकार बनने की घोषणा लोगों में आजादी का जज्बा भरने वाली बात थी।

राजा महेंद्र प्रताप सिंह की ही राह पर आगे चलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस भी चले. दोनों ने बाहर देशों में जाकर निर्वाचित सरकारें बनाईं, इसे लेकर दोनों में… समानता जरूर है, लेकिन दोनों की पॉलिटिकल राह अलग मानी जाती है. सुभाष चंद्र बोस जहां घोष‍ित तौर पर कांग्रेसी नेता थे, वहीं राजा महेंद्र प्रताप सिंह कांग्रेसी नहीं थे. हां, उस दौर में कांग्रेस के बड़े नेताओं तक उनकी धाक जरूर जमी थी. महेंद्र प्रताप सिंह पर प्रकाशित अभिनंदन ग्रंथ में महात्मा गांधी से उनके पत्राचार से इसका साफ पता चलता है.

महात्मा गांधी ने कहा था कि राजा महेंद्र प्रताप के लिए 1915 में ही मेरे हृदय में आदर पैदा हो गया था. उससे पहले भी उनकी ख़्याति का हाल अफ़्रीका में मेरे पास आ गया था.उनका पत्र व्यवहार मुझसे होता रहा है जिससे मैं उन्हें अच्छी तरह से जान सका हूं. उनका त्याग और देशभक्ति सराहनीय है इन सबके बीच जो चर्चा सबसे आम रही, वो ये थी कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने जमीन दान दी थी और यूनिवर्सिटी कैंपस में उनके योगदान का कहीं जिक्र नहीं है। इस पहलू पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता उमर पीरज़ादा ने एक रिपोर्ट में कहा कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह हमारे यूनिवर्सिटी के ही छात्र रहे हैं, ऐसे में हम सब के लिए उनके नाम पर एक शैक्षणिक केंद्र का खुलना गर्व की बात हे बता दें कि ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार राजा महेंद्र प्रताप सिंह पहले यहां चलने वाले स्कूल और कॉलेज के निर्माण में वित्तीय मदद की थी.

राजा महेंद्र प्रताप सिंह के एएमयू के निर्माण में उनके योगदान पर उमर पीरज़ादा ने कहा कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को 1929 में 3.8 एकड़ की ज़मीन दान की थी। यह जमीन मुख्य कैंपस से अलग शहर की ओर है जहां आज आधे हिस्से में सिटी स्कूल चल रहा है और आधा हिस्सा अभी खाली है. आज भले ही उनके नाम पर तमाम चर्चाएं हो रही हों लेकिन इतिहास में दर्ज उनकी छवि बताती है कि वो हिंदू-मुस्ल‍िम बहस से कहीं ऊपर. हमेशा देशभक्त के तौर पर जाने जाएंगे। जैसा की हमने हाल ही में देखा भारत के यसस्वी प्रधानमंत्री और उत्तरप्रदेश के कर्मयोगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजा महेंद्र प्रताप विश्विधालय का शुभारंभ किया !

अब दोस्तों सवाल ये हे की क्या भारतीय जनता पार्टी वोट बैंक की राजनीती के लिए ये सब कर रही हे या फिर पुराने इतिहास के शूरवीर योद्धाओ और सच्चे स्वंत्रता सेनानियों के लिए उनकी याद में ये भव्य निर्माण हो रहे हे चाहे वो सरदार वल्लभभाई पटेल की सबसे बड़ी मूर्ति हो या राजा महिंद्रा प्रताप सिंह कॉलेज हो या फिर भव्य राम मंदिर का निर्माण ही क्यों ना हो दोस्तों इन चीजों के बारे में अपनी राय कमेंट सेक्शन में जरूर दीजियेगा और वीडियो पसंद आयी हो तो वीडियो को लाइक शेयर जरूर कीजियेगा धन्यवाद .

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