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AC कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए भारत की पहली पीएलआई योजना चीन आयात पर प्रतिबन्ध

भारतीय मार्केट में बिकने वाले 95% ac भारत में assemble किए जाते हैं। पर इन असेंबली ac में केवल 30% के आसपास हीं लोकलाइजेशन होता है और लगभग 70% कॉम्पोनेन्ट और पार्ट चाइना वियतनाम और मलेशिया से इम्पोर्ट किये जाते हे

एयर कंडीशनर में लगने वाले कंपनी इंडिजिनाइजेशन को बढ़ाने के लिए pli स्किम निकाली जा चुकी है और इस इंडस्ट्री में चाइना के इंपोर्ट पर ताला लगाए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। 6238 करोड रुपए की pli में भाग लेने के लिए वोल्टास ब्लू स्टार , डिक्सॉन जेसी कंपनी के अलावा चाइना की जीएमसीपी भी अपना नाम देने के मूड में है। सबसे इंपोर्टेंट बात यह है कि इस पीएलआई को इसी में मैन्युफैक्चरिंग की बजाय केवल इसी में लगने वाले कॉम्पोनेन्ट की मैन्युफैक्चरिंग के लिए ही लांच किया गया है और इसी वजह से जो कंपनीज भारत में ऐसी असेंबल करने के लिए अपने प्लान आगे रख चुकी हे , अब वह कंपनी अपने बेसमेंट को लेकर पांव पीछे खींचते हुए दिखाई दे रही हैं। इस पीएलआई में अपना नाम दर्ज कराने की आखिरी डेट 15 सितंबर दी गई है और कुछ कंपनी इसने कॉम्पोनेन्ट की मैन्युफैक्चरिंग के प्लांट आगे भी रख दिए हैं। जहां चाइना की gmcc पुणे में 700 करोड़ रुपए निवेश करके कंप्रेशन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने जा रही है। वहीं ब्लू स्टार और लोरिट हीट एक्सचेंजर और मैन्युफैक्चरर यूनिट स्टेप करने का प्लान आगे रख चुकी हे कांटेक्ट मैन्युफैक्चर एम्बर ने भी 400 करोड़ रुपए मैन्युफैक्चरिंग में निवेश करने के प्लान को आगे रख दिया है और AC में लगने वाले प्रिंटेड सर्किट बोर्ड की मैन्युफैक्चरिंग के लिए डिक्सॉन ने हाथ मिलाया है।

जापान कंपनी के साथ कैरियर मायडिया और HIRE इस पीएलए के लॉन्च होने से पहले से ही अपनी नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पर काम कर रही थी। इसलिए कंपनी मैन्युफैक्चरिंग के लिए दोनों ही कंपनी ने किसी भी प्रेस इन्वेस्टमेंट को करने से मना कर दिया है वहीं सैमसंग एलजी गोदरेज Dyking जैसी बड़ी कंपनी इस pli में पार्टिसिपेट करने के लिए अभी सोच विचार कर रही है। पहले टेलीकॉम और फिर आईटी में दी गई पीएलआई से बाहर रहने के बाद अब देखना यह है कि क्या शाम संगीत पेलाई को भी हाथों से जाने देगी या फिर हम इस सैमसंग की तरफ से कोई बड़ा इन्वेस्टमेंट प्लान देखने को मिलेगा भारत में हर साल लगभग 7:30 मिलियन ac की यूनिट बेची जाती हैं। पर आने वाले सालों में लगभग 40 मिलियन एसी यूनिट के प्रोडक्शन का अंदाजा लगाया जा रहा है, जिसमें से अकेले 16 मिलियन यूनिट एक्सपोर्ट किए जाने का टारगेट अगले 5 सालों में रखा गया है ac कॉम्पोनेन्ट केpli के साथ जहां कई कंपनी खड़ी हुई है, वहीं कुछ ऐसी कंपनी है जो इसका विरोध कर रही है और वह ऐसी कंपनी से जो भारत में कॉम्पोनेन्ट इस्तेमाल करने के बाद ac अस्सेम्ब्ले करती हे ।

पिछले साल से सस्ते chinis ac पर लगाम लगाने के लिए भारत ने पूरी तरीके से इन ac पर इम्पोट पर बैन लगा दिया था क्योंकि गर्मी आते ही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का इस्तेमाल करके इन चाइनीस चीज को बांग्लादेश बेचना, मलेशिया और दूसरे देशों से भारत में धड़ल्ले से इंपोर्ट किया जा रहा था। इंपोर्ट बंद होने के बावजूद भी भारत की tear 2 और tear 3 सिटीज में अभी भी कुछ ऐसे छोटे मैन्युफैक्चरिंग चाइनीस ac को कंप्लीट क्लीनोडर्म फिट की फॉर्म में इनपुट करके असेंबल करने के बाद भारतीय मार्केट में बेच रहे हैं क्योंकि अभी तक ac पार्ट के इंपोर्ट पर बहुत ही कम इंपोर्ट ड्यूटी लगाई जाती है। आपको बता दें कि भारत में ac कंप्रेसर को मैन्युफैक्चर करने वाली सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरर भी एक चाइनीस कंपनी है और इस कंपनी के निर्माण यूनिट गुजरात में स्थित है।

इस कंपनी का नाम है हाईली, ac कंप्रेस्ड मेनिफेस्टिंग यूनिट सेट करने में बहुत बड़े इन्वेस्टमेंट चाहिए होता है। इसलिए हमें इस बात पर संदेह है कि शायद ही कोई भारतीय मैन्युफैक्चरर कंप्रेशन मेनिफेस्टिंग के लिएइस pli में अपना नाम आगे दे । पर अभी भी टाटा वोल्टास इन्वेस्टमेंट को लेकर प्लान आने बाकी हैं

और हम उम्मीद करते हैं कि हर पिलाई की तरह ही टाटा इस बार भी किसी बड़े इन्वेस्टमेंट प्लांट के साथ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कदम रखेगी। मैन्युफैक्चरिंग के लिए उठाए गए इस बड़े कदम को अपना सपोर्ट दिखाने के लिए कमेंट सेक्शन में एमआई आई मेड इन इंडिया जरूर लिखेगा और हां हमारी पोस्ट को लाइक जरूर कीजियेगा। धन्यवाद जय हिंद!

 

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