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11,186 करोड़ रुपये की कमाई, भारतीय रेलवे ने रिकॉर्ड किया “उच्चतम माल ढुलाई”

दोस्तों भारतीय रेलवे ज्यादा से ज्यादा अपने फ्रेट ऑपरेशन को और तेजी से बढ़ाने का प्रयास कर रही है। क्योकि अभी के हालात को अगर हम देखें तो यहां पर तो सबसे ज्यादा ट्रांसपोर्टेशन फ्रेट का होता है

रोड ट्रांसपोर्ट से ही। मतलब रोडवेज यहां पर फर्स्ट प्रायोरिटी बन चुकी है और वही रेलवे से यह लगभग पूरे जो भी लॉजिस्टिक है, उसका 27% ही ट्रांसपोर्ट होता है तो यह काफी ज्यादा कम है और इसके लिए आपने देखा होगा। भारतीय रेलवे ने टारगेट सेट किया है। उनका ऐसा टारगेट है कि आने वाले 10 साल के भीतर यानी कि आप पकड़ लीजिए। 2030 तक 27% को 45% करना चाहते हैं ओल मोस्ट आप कह सकते हो कि जितना लॉजिस्टिक ट्रांसपोर्टशन होता है लगभग उसका आधा इंडियन रेलवेज को अपने फ्री ट्रांसपोर्टेशन सही करना है और इसको लेकर अब एक अच्छी खबरें भी आ रही है। दरअसल पिछले ही महीने जून के डाटा को अब फाइनली रेलवेज रिलीज कर दिया है और यहां पर तो एक रिकॉर्ड अर्निंग हुई है। रेलवेज ने यहां पर 11,186. 81 करोड़ रुपे अर्न किये ह

फ्रंट लोडिंग से और यह आंकड़ा लगभग 26.7% हायर है। पिछले साल जून के महीने से तो ऐसी ट्रांजैक्ट्री को मेंटेन रखते हुए यहां पर पेड सर्विस ने काफी अच्छा मोमेंटम को गैंग किया है।इन टर्म्स ऑफ़ रनिंग इन टर्म्स ऑफ़ लोडिंग कोविड-19 चैलेंज के बावजूद भी और फ्रीलोडिंग की बात करें तो यहां पर तो पिछले महीने जून के महीने में इन्होंने 112.65 मिलीयन टंस ऑफ गुड्स को कैर्री किया है जो कि पिछले साल के जून के महीने से 20% ज्यादा है, पर इन सब पीछे कई सारी कारण भी है।सबसे पहले तो आपने देखा होगा कि आजकल जो काफी सारी ऐसी माल गाड़ियां है जो जिसको प्यूकिलर सेक्शन में दौड़ रही है

उनकी एवरेज स्पीड तो राजधानी ट्रेन से भी काफी ज्यादा हाय हे दूसरी सबसे बड़ी बात यहां पर डबल अटैक कंटेनर्स को यूज करके मल्टीपल लोकोमोटिव्स को कनेक्ट कर दिया जाता है। एक साथ और यह ट्रेन काफी लंबी होती है। काफी लंबी दूरी तक आसानी से यह ट्रेवल कर सकती है। बेहद ही प्रभावशाली तरीके से !! तीसरी सबसे बड़ी बात यहां पर तो भारी कंसेशंस डिस्काउंट भी दिए जा रहे हैं। भारतीय रेलवे की तरफ से ताकि जितनी भी जो भी लोग हैं जिन्हें अपने लॉजिस्टिक ट्रांसपोर्ट करना है। अपने फ्रेंड को मुंह करना है तो उनके लिए भारतीय रेलवे एक काफी अट्रैक्टिव डेस्टिनेशन बन जाए और इसमें स्पीड डेफिनेटली काफी ज्यादा मैटर करता है। बिकॉज़ मान लीजीये अगर कोई परेशेबल आइटम हो तो यहां पर तो डिले का सवाल उठता ही नहीं है। लास्ट 90 मंथ के डाटा को देखें तो उसके कंपैरिजन में तो अभी जो प्रेफरेंस की स्पीड है तो वह तो ऑलमोस्ट डबल ही हो गई है तो यह काफी अच्छी बात है। पहले क्या प्रॉब्लम था कि जो डिजाइन और कंस्ट्रक्शन था। रेलवे ट्रेक इनप्रॉपर था। इसकी वजह से यहां पर ऑपरेशन मेंटेनेंस पर काफी ज्यादा खर्चा करना पड़ जाता था। रेलवेज को. लेकिन अभी अगर आप नजर डालो तो यहां पर बेहद ही हार्ड रेलवे ट्रैक का यूज किया जा रहा है जिसे आजकल r260 ग्रेड ऑफ शिल्पी कहा जाता है जो कि काफी ज्यादा इस्ट्रोग होता है

और डीपी के लिए हमारे जो अभी फिलहाल के जो रेलवे लाइन हे तो उनमें डिजाइन स्पीड स्पेशली पैसेंजर ट्रेंस के लिए ही डिफाइन की गई है। बट यहां पर माल गाड़ियों को भी एंट्री दे दी जाती थी। बीकोज शुरू से ही कोई एक प्रॉपर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बनाया गया और हम जर्मनी की तरह भी नहीं कर सकते कि जैसे कि वह दिन के टाइम में बुलेट ट्रेन चलाते हैं और रात के टाइम पर वही सेम ट्रिक्स पर मालगाड़ी ट्रेन चलाते हैं। काफी हाइ स्पीड पर पर बिकॉज़ हमारे यहां तो दिन रात रेलवे पैसेंजर ट्रेन चलाई जाती है। ऐसे समय में एक प्रॉपर डेडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर की इंफ्राटक्चर को डेवलप करना काफी इंपॉर्टेंट बन गया है

lakin  2022 या 2024 तक अब हमारी रेलवे इसमें जो भी डेडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर बनाए जाएंगे, उसमें से काफी हद तक वो ऑपरेशन हो जाएंगे आपकी क्या राय है इसके बारे में कमेंट सेक्शन में जरूर बताइये धन्यवाद

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