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पेट्रोल की महंगाई से छुटकारा 100% भारत में निर्मित ईंधन IIT वैज्ञानिकों ने चुंबक से सस्ता हाइड्रोजन ईंधन विकसित किया

तो दोस्तों अब यहां पर आईआई टी मुंबई ने तो एक काफी बड़ा कमाल करके दिखा दिया है। यहां पर इन्होंने ऐसी तकनीक ऐसी टेक्नोलॉजी को विकसित कर लिया है। जिसके तहत पानी से हाइड्रोजन बनाना काफी ज्यादा आसान हो जाएगा

जिसके तहत पानी से हाइड्रोजन बनाना काफी ज्यादा आसान हो जाएगा और यह इन्होंने मैग्नेट के थ्रू करके दिखा दिया है और इंपैक्ट यहां पर मिनिस्ट्री ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने भी यहां पर मेंशन किया है। यहां पर आप उनका आर्टिकल देख सकते हो जहां पर साफ-साफ मेंशन किया गया है। न्यू मेथड ऑफ ट्रीस इन हाइड्रोजन फ्रॉम वॉटर यूजिंग मैग्नेट शूज एनर्जी एफिशिएंट रूट टू मैन्युफैक्चरिंग ऑफ़ फ्यूल तो इसके बारे में मैं आपको इस आर्टिकल में बताऊंगा। इनकी क्या टेक्नोलॉजी है। यह किस तरह से वह करता है। यह सभी मैं आपको बताऊंगा और साथ ही में हम जानेंगे कि एक कितना ज्यादा कॉस्ट इफेक्टिव है। अभी की जो टेक्नोलॉजी है तो कितना यह फास्ट है और कितना सस्ता है। यह सभी मैं आपको इस आर्टिकल के भीतर बताऊंगा इसलिए तब जरूर बने रहिए। टेक्नोलॉजी को डेवलप किया है आईआईटी बॉम्बे की एक रिसर्च टीम ने।

प्रोफेसर सी सुब्रमण्यम अब यह जो मॉडल इन्होंने तैयार किया है, इसके टेस्टिंग भी की थी। हमारे एक नॉर्मल सिस्टम के साथ यहां पर उन्होंने observe किया कि नॉर्मल 1ml ऑफ हाइड्रोजन प्रोड्यूस करने में जितना टाइम लगता था तो इतने टाइम में इनकी टेक्नोलॉजी ने तो 3ml ऑफ हाइड्रोजन जनरेट कर दिया है और वह भी 19% लो एनर्जी को कंज्यूम करते हुए सो अपने आप में काफी बड़ी बात है। 3 गुना तेज यहां पर प्रोडक्शन हो रहा है और वह भी काफी सस्ते में इस मैटर में उन्होंने वॉटर इलेक्ट्रोलिसिस प्रोसेस के दौरान एक्सटर्नल मैग्नेटिक फील्ड का यूज किया है। यहां पर इन्होंने काफी presize ली इसलिए सिनर्जिस्टिकली कपलिंग की है। इलेक्ट्रिक एंड मैग्नेटिक फील्ड की ऐड कैटालिटिक साइट और इसकी वजह से यह आज के समय में इतना ज्यादा एफिशिएंट और कॉन्ट्रैक्ट ढंग से काम करता है। इसके साथ ही इस प्रोसेस में उन्होंने इलेक्ट्रोकैटालिटिक मटेरियल को बॉक्साइट किस कभी यूज़ किया है इस तरह के इनोवेटिव नैनोट्यूब्स को उन्होंने मिनिस्ट्री मैटेरियल फॉर एनर्जी स्टोरेज प्रोग्राम।

टेक्नोलॉजी मिशन डिवीजन के साथ colabriction के डेवलप किया है और यह भी एक काफी प्राइम इंपॉर्टेंट सकता है। इस तरह के इफेक्ट को लाने के लिए इसकी इंपॉर्टेंस ऑफ इसी बात से अंदाजा लगा सकते हो कि इस मटेरियल के चलते हमें अब बिल्कुल भी एकदम कांस्टेंट एक्सटर्नल मैग्नेटिक फील्ड प्रोवाइड करने की आवश्यकता ही नहीं है। बस इसे ऑपरेशन के लिए हमें एक ही बार एक्सपोजर देना पड़ता है। मैग्नेटिक फील्ड का मान लीजिए 10 मिनट के लिए दे दिया। फिर उसके बाद 45 मिनट तक यह कंटिनयसली वर्क करता रहेगा। हाई रेट ऑफ हाइड्रोजन को प्रोडूस करता रहेगा। एंड बिकॉज़ ऑफ देश भारत के पास अभी काफी afficent टेक्नोलॉजी आ चुकी है। हाइड्रोजन प्रोडक्शन को लेकर हाइड्रोजन की बात करें तो आपको और पूरी दुनिया इसे फ्यूचर फूल के नाम से भी जानती है। काफी कंपनी इसने तो ऑलरेडी हाइड्रोजन पर चलने वाले व्हीकल स्ट्रक्स बसेस डेवलप कर लिया है। इन पर भारत ने भी विकसित किये है। बट जो प्रोसेस है हाइड्रोजन प्रोडक्शन का वह काफी ज्यादा कॉन्प्लिकेटेड है और जितना ज्यादा यह रिफंड होगा उतनी ही सस्तीय टेक्नोलॉजी।

बनती जाएगी और उतना ही अफॉर्डेबल यह फ्यूल होगा। ऐसे समय में जहां इंडिया अब तेजी से पेट्रोल में भी ब्लेंडिंग कर रहा है। एथिनोल कि यहां पर पेट्रोल डीजल व्हीकल को इलेक्ट्रिक हाइड्रोजन सीएनजी बायोडीजल mithenal or  इथेनॉल इन सभी अल्टरनेटिव फ्यूल से रिप्लेस करने की बात की जा रही है तो ऐसे समय में डेफिनेटली हाइड्रोजन भी एक काफी ज्यादा गेमचेंजर साबित हो सकता है। आने वाले 5 साल के भीतर अगर हमने इस पर ध्यान नहीं दिया और यूं ही जो इंपॉर्टेंट क्रूड ऑयल का वह करते रहे। हम तो यह बिल 5 साल के भीतर ₹1500000 के हो जाएंगे जो कि एक काफी में से अमाउंट है। इतने पैसों में तो हम मुंबई अहमदाबाद, बुलेट ट्रेन जैसे 15 कॉरिडोर बना सकते हैं। पूरे भारत में प्रोफेसर सुब्रमण्यम जी ने भी कहा है कि इस तरह के एक्सटर्नल मैग्नेटिक फील्ड का यूज करके हमने 1 नई खोज की है। एनर्जी एफिशिएंट हाइड्रोजन की जनरेशन में ना उसमें हम और भी कई तर्क ए कैटालिस्ट कभी यूज कर सकते हैं। काफी सारे भेज दो किए जा सकते हैं और इसे हम काफी आसानी से किसी भी।एक्जिस्टिंग इलेक्ट्रोलाइजर में भी अडॉप्ट कर सकते हैं कि इतना ज्यादा फ्लैक्सिबल है।

यहां पर हमें ज्यादा कुछ एक्सट्रीम चेंज नहीं करना है। बट कुछ मॉडिफिकेशन सॉन्ग के डिजाइन में एंड डेट शीट आगे उन्होंने कहा कि भारत भी अब हाइड्रोजन 2019 मी पर फोकस करता जा रहा है और इन्होंने भी अब अपना एम तैयार कर लिया है। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट पर हम मिशन मोड में काम करेंगे और करंट लिए कुछ अपनी इंडस्ट्रेक पार्टनर्स के साथ भी काम कर रहे हैं ताकि जल्द से जल्द इसका सक्सेसफुल कमर्शियलाईजेशन भी स्टार्ट कर दिया जाए।

इसके पहले ऑलरेडी आईआईटी मद्रास भी रिसर्च कर रहे हैं। वह सी मोटर से हाइड्रोजन को प्रवेश करने के टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं। एंड अब आईडी मुंबई मैग्नेटिक फील्ड के हेल्थ से हाइड्रोजन प्रोडूस करने की टेक्नोलॉजी विकसित कर ली है। इसके बारे में आपकी क्या राय है। जल्दी से कमेंट कीजिएगा और साथ में लाइक भी कीजियेगा धन्यवाद।

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