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24 साल बाद आखिर खुल ही गया ‘दिव्या भारती’ की मौत का राज़

14 साल की उम्र में एक लड़की बॉलीवुड में आती है 1992 में उनकी पहली फिल्म आती है और 93 के आते आते वो 14 फिल्मो में काम कर चुकी होती है | जिस एक्ट्रेस ने शुरुआत की थी आयशा जुल्का और पूजा भट्ट और  वही चन्द फिल्मो के बाद श्री देवी और माधुरी से compare होने लगती थी |

लेकिन सच्चाई तो ये थी की उन्हें ग्लैमर और हीरोइन बनने का बिलकुल शौक नहीं था बल्कि वे फिल्मो में जबरदस्ती खींची गई | जिसको कभी भी किसी ने एक्टिंग नहीं सिखाई बल्कि उनका टैलेंट गॉड गिफ्ट और अंदरूनी था जी हाँ दोस्तों हम बात कर रहे है

90 के दशक चूल बुली बेहद ही खूबसूरत और लोकप्रिय अभिनेत्री ‘दिव्या भारती’ के बारे में, जिन्होंने बहोत ही कम समय में लोगो के जहन में ऐसी जगह बनाई की आज भी लोग उनके बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते है || आमतोर पर जब भी दिव्या भर्ती का नाम सामने आता है तो लोग उनके फ़िल्मी केरियर की बजाय उनकी मृत्यु के रहस्य को जानने के लिये ज्यादा बेताब रहते है |

आज के इस  में हम बतायेगे दिव्या भारती के जीवन से जुडी हुई ऐसी कई दिलचस्प बाते जिन्हे शायद ही कोई जानता हो ! आप से request है की वीडियो को अंत तक जरूर देखे  चलिये जानते है दिव्या भारती के इतने कम उम्र में इतनी बुलंदिओ पर पहुंचने और साजिद से मोहब्बत से लेकर मौत तक की पूरी कहानी !

दिव्या का जन्म 25 फरवरी 1974 को मुंबई में हुआ था | उनके पिता का नाम था ‘ओम प्रकाश भारती’ और वे एक insurance कम्पनी में ऑफिसर्स थे | दिव्या भर्ती अपने पिता की दूसरी पत्नी की संतान थी और उनका नाम था मीता भारती | दिव्या भारती का एक छोटा भाई भी है कुनाल !

दिव्या ने मुंबई के जुहू इलाके के मानकचजी कूपर हाई स्कूल से पढ़ाई की लेकिन वो केवल 9 स्टैंडर्ड   तक ही पड़ी दिव्या पढ़ाई में बिलकुल ज़ीरो थी उन्हें पड़ना बिलकुल ही पसंद नहीं था महज़ 16 -17 साल की उम्र में कई फिल्मो के ऑफर आने लगे थे कई सारे प्रोडूसर उनके घर आकर उनके पेरेंट्स से request करते थे की प्लीज़ हमारी एक फिल्म करने दीजिये |

दिव्या ने अपनी माँ को पूछा की अगर में फिल्मो में काम करुँगी तो मेरी पढ़ाई का क्या होगा ! तो उनकी माँ बोली तुम फिल्मो में जाओगी तो पढ़ाई बंद करनी पड़ेगी, बस दिव्या तुरन्त ही फिल्म करने के लिए राज़ी हो गई | क्योंकि उनको पढ़ाई करना बिलकुल ही पसंद नहीं था !

और पढ़ाई  से पीछा छुड़ाने का इससे बेहतर और कोई मौका नहीं मिलता ! और दिव्या तुरंत ही बोली माँ तुम पापा को बोलो की मुझे ये फिल्म करने दे पिता ने भी कहा ठीक है एक फिल्म करनी है तो करने दो ! इस तरह दिव्या ने पढ़ाई के बिच ही एक्टिंग का दामन थाम लिया |

दरअसल फिल्म मेकर नंदू तोलानी ने दिव्या को सबसे पहले तलाशा था | हालाँकि दिव्या के फ़िल्मी कैर्रिएर की शुरुआत सन 1990 में गुनाहों का देवता से होनी थी | मगर उनका रोल हटा दिया था | इसके बाद गोविंदा के बड़े भाई कीर्ति कुमार ने एक  लाइब्रेरी में दिव्या को देखा तो तुरंत ही मन बना लिया

फिल्म ‘राधा का संगम’ में गोविंदा के साथ दिव्या को हीरोइन लेने का, उसके बाद दिव्या को साइन भी किया गया लेकिन आखरी मोके पर जूही चावला को ये रोल दे दिया गया | दिव्या इस फिल्म से भी बाहर हो गई, ऐसा एक बार नहीं बल्कि कई बार हुआ दिव्या को  हिंदी फिल्मो से बाहर कर दिया गया !

और उनकी जगह दूसरी अभिनेत्रीयो को जगह मिली, लेकिन बदकिस्मती दिव्या के साथ ज्यादा नहीं चल सकी और वो वक्त आया जब दिव्या की किस्मत रातो रात बदल गई | ये सब संभव हो पाया ‘डी रमन नायडू’ की वजह से इन्होने अपनी तेलगु फिल्म में ‘दग्गुबाती वेंकटेश के साथ हीरों साइन कर लिया |

और ‘बोब्बिली राजा’ फिल्म  जबरदस्त हिट हुई | जिसके बाद दिव्या ने एक से बढ़ कर एक कई हिट फिल्मे दी ! तेलगु सिनेमा में दिव्या ने धूम मचादी थी ! जिसकी गूंज हिंदी सिनेमा तक भी पहुंची और दिव्या हिंदी फिल्मो से भी ज्यादा समय तक दूर नहीं रह पाई ! जिसके बाद सनी देओल के साथ फिल्म ‘विश्वात्मा’ में  वे बतोर हीरोइन नजर आई |

फिल्म के गाने सात समन्दर पार ने एक ही फिल्म से दिव्या को लाखो दिलो की धड़कन बना दिया और दिव्या हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भी छा गई ! जिसके बाद दिव्या नजर आई ‘दिल का क्या कसूर’ फिल्म में, लेकिन ये फिल्म कुछ खास नहीं चली | तब ही आई वो फिल्म जिसने धमाल मचा दिया  ये फिल्म थी, ‘शोला और शबनम’ जिसमे दिव्या गोविंदा के

opposite नजर आई | ये वो वक्त था जिसने दिव्या भारती की जिंदगी पूरी तरह बदल दी थी | दिव्या के पास एक से बढ़ कर एक कई फिल्मो की लाइन लग गई थी | फिल्मो का काम धूम धाम से चल रहा था लेकिन उनका नाम कई हीरो के साथ जोड़ा जा रहा था |

इन सब controvesies को छोड़ कर दिव्या,10 मई 1992 को मशहूर फिल्म निर्माता ‘शाजिद नाडियादवाला’  के साथ पवित्र बंधन में बंद गई थी | तब दिव्या मात्र 18 साल की थी | दिव्या और साजिद की मुलाकात फिल्म शोला और शबनम के सेट पर हुइ थी जब साजिद गोविंदा से मिलने के लिए सेट पर पहुँचे वहा उन्हें पहली ही नज़र में दिव्या  से प्यार हो गया !

शादी होते ही उन्होंने ये राज़ कुछ दिनों तक दुनिया से छुपा कर रखा | क्योकि दिव्या उस वक्त सफ़लता की बुलंदियों पर थी | क्योकि शादी की बात उनके carrier में रुकावट बन सकती थी | 5 अप्रैल 1993 की रात वो घड़ी आई जब दिव्या दुनिया छोड़ चली गई |

मुंबई शहर के अन्देरी ईस्ट के वर्सोवा इलाके में तुलसी पठवन में 5 मंजिल पर दिव्या भारती रहती थी | और ये अपनी घर की खिड़की से गिर गई जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई ! जिस दिन  उनकी मौत हुई उस दिन मूवी के शूटिंग के चलते हैदराबाद जाना था |

लेकिन उस दिन उन्होंने शूटिंग कैंसिल कर दी क्योकि उस दिन उन्हें अपने नये फ्लैट की बुकिंग के लिए जाना था | दिव्या उस दिन काफ़ी खुश थी वो फ्लैट के रजिस्ट्रेशन का सारा काम ख़त्म करके अपने घर वापस लोटी जहाँ उनके costume designer नीता लूला और उनके हस्बैंड पहले से ही उनका इंतजार कर रहे थे |

सब मिलकर बाते करते करते ड्रिंक कर रहे थे | वही दिव्या की मेड किचन में खाना बना रही थी तभी दिव्या किचन में आकर विंडो में बैठ पर बात कर रही थी की अचानक से imbalance होने की वजह से वे निचे गिर गई |  दिव्या जहाँ गिरी वहाँ हमेशा कई कारे खड़ी रहती थी |

लेकिन दुर्भाग्य की बात ये थी की उस दिन कोई कार नहीं थी | उसके बाद कई जाँच पड़ताल हुए की दिव्या की मोत आत्महत्या थी या मर्डर या फिर किसी की सोची समझि साजिश, वजह चाहे कोई भी हो लेकिन बॉलीवुड ने एक सितारे को खो दिया एक ऐसा सितारा जिसकी चमक बीते कल भी थी और आज भी है

ऐसी थी जबरदस्त अदाकारा दिव्या भारती, दिव्या के जाने के बाद कुछ ऐसी फिल्म भी रही जिन्हे नये सिरे से फिर बनाया गया अनिल कपूर की फिल्म ‘लाड़ला’  80%  तक पूरी हो चुकी थी जब दिव्या भारती का निधन हुआ

और बाद में श्री देवी ने वो रोल निभाया और भी फिल्म में दुसरी हिरोइंस आई जैसे मोहरा, विजय पत्त,आंदोलन, तेलगु फिल्मो का भी यही हाल रहा दिव्या भारती को लोग दिल से आज भी याद करते है।

 

 

 

 

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