Breaking News

रूस फ्रांस, अमेरिका और इजरायल को तगड़ा झटका, भारत निकला इनसे आगे

फाइटर जैट से लेकर टैंक, समरीन, मिसाइल, हेलिकॉप्टर और जितने भी अन्य बड़े बड़े हथियार है इन सभी में कई तरह के छोटे छोटे इलेक्ट्रिकल स्टील और कई तरह क्म्पोनेट व् पार्ट्स लगे होते है ऐसे में जो कम्पनी इन बड़े बड़े वेपन सिस्टम को बनाती है वो इन छोटे छोटे पार्ट्स को दुसरे देशो व् दूसरी कम्पनियों से खरीदती है.

इसके बाद इन्हें अपनी असेम्बली लाइन में लाकर वहां पर जोडकर एक फाइनल हथियार बनाकर उनको बेच देती है. दस्सौल्ट एविएशन रिफेल फाइटर जैट को मैन्यूफैक्चर करती है और अपने कई सारे क्म्पोनेट्स और स्पेयर पार्ट्स के अलावा अन्य चीजे दूसरी छोटी छोटी कम्पनियों से खरीदती है.

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ जी ने हथियारों के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पिछले साल 2020 में 108 और इस साल 101 छोटे बड़े हथियारों की लिस्ट जारी की थी. जिनको अब विदेशो से नही खरीदा जायेगा.

ये सभी हथियार कुछ सालो के बाद पूरी तरह से डोमेस्टिक मार्किट से खरीदे जाने है लेकिन यहाँ पर परेशानी ये थी कि यहाँ रोक लगाई गयी थी फिनिश्ड हथियारों के उपर न की उसमे लगने वाले क्म्पोनेट और पार्ट्स के उपर.

मोदी सरकार चाहती थी कि जो भी हथियार भारत में तैयार होगा उसमे फिट किये जाने वाले क्म्पोनेट्स भी मेड इन इंडिया ही हो. इसके चलते सरकार को इस बात का डर भी था कि इन सभी बड़े बड़े हथियारों के लिए भारत केवल एक असेम्बली लाइन बनकर ही न रह जाये.

भारत की डोमेस्टिक मार्किट की कम्पनी विदेशो से पार्ट्स और क्म्पोनेट को खरीदकर यहाँ लाकर और उन्हें असेम्बल करके हथियार को पूरा बनाना न शुरू कर दें. अगर ऐसा होता है तो भारतीय डिफेन्स इंडस्ट्री को इससे कोई फायदा नही होने वाला है.

ऐसे में डिफेन्स डील का बहुत ज्यादा पैसा केवल कम्पोनेट और पार्ट्स मैन्यूफैक्चरिंग करने वाली विदेशी कम्पनियों को चला जाता. इस लूपोल को फ़ैल करने के लिए सरकार ने कोई बड़ा कदम उठाना था. भारत सरकार ने एक बहुत ही बड़ा फैसला लिया है

भारतीय सरकार की डिफेन्स मिनिस्टरी ने एक बार फिर से हर साल इपोर्ट की जाने वाली 351 आइटम्स और 2500 स्बस सिस्टम और क्म्पोनेट की एक लिस्ट जारी की है. इनके पोर्ट के उपर अगले 3 साल में रोक लगाई जाएगी. 2500 क्म्पोनेट के अलावा 351 आइटम्स की तीसरी लिस्ट दिसम्बर 2022 तक उसमे 172 आइटम्स की इम्पोर्ट पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी.

इसके बाद दिसम्बर 2023 तक 89 और दिसम्बर 2024 तक आखिरी की 90 के उपर भी पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी. जब इन कम्पोनेंट की प्रोडक्शन भारत में शुरू होगी तो 3 हजार करोड़ रूपये सीधा बच जायेंगे. जब ये क्म्पोनेट भारत में बनने शुरू हो जायेंगे तो दूसरी कम्पनियों को इन्हें बेचकर भारी प्रॉफिट भी इससे होने वाला है.

आज के समय में सारी चीजे मुख्य तौर पर 4 देशो की कम्पनी से खरीदी जाती है जिनमे फ्रांस, अमेरिका. रूस और इजरायल शामिल है. ऐसे में भारत जोकि दुनिया के सबसे बड़े आम इम्पोर्टर देशो में से एक है उसका डिफेन्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर की राह पर चल पड़ना इन सभी देशो के लिए एक बहुत ही बड़ी चिंता का विषय होने वाला है.

फिलहाल भारत अपने भले के लिए काम कर रहा है लेकिन इन सभी देशो की कम्पनियों के पास अभी भी एक विकल्प है और वह ये है कि ये विदेशी कम्पनियां भारत के साथ मिलकर भारत में डिफेन्स मैन्यूफैक्चरिंग करना शुरू कर सकती है और यहाँ से हथियार विदेशो के लिए बेच भी सकती है.

 

About NR Thakur

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *