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रूस के बाद फ़्रांस भी कूड़ा भारत को FRCV का बड़ा ऑफ़र देने, भारत के सामने अब डबल ऑफ़र

भारतीय आर्मी के कितने प्रतिशत हथियार रूस टेक्नोलॉजी पर आधारित है इस बात की पुष्टि अबतक नही हो पाई है लेकिन कई बार मिडिया द्वारा कई तरह की खबरे सामने आई है जिनमे से कुछ खबरों में बताया गया है कि आज भी भारत के 60 से 70 % हथियार या तो रूस द्वारा बनाये गये है या फिर रूस की मदद से इन हथियारों को भारत में बनाया गया है.

रूस द्वारा बनाये गये हथियार हमारी आर्मी, एयरफोर्स और नेवी सभी ज्यादा संख्या में इस्तेमाल करती आ रही है. आपको जानकारी होगी कि एप्पल आईफोन का ही एक बराबरी का सिस्टम होता है. फोन, हैडफोन घड़ी, लैपटॉप, टैब ये सब कुछ एप्पल कम्पनी से खरीदने के लिए या तो मजबूर हो जाते है

या फिर वो लोग खुद ही खरीदना पसंद करते है. कुछ साल पहले भारत की भी ऐसी स्थिति थी जब हम फाइटर जेट से लेकर टैंक सम्बरिन, हैलिकोप्टर और न जाने कितने सारे अलग अलग हथियारों को केवल रूस से ही खरीदा करते थे.

रूस ने पिछले कई सालो में भारत को कई सारे हथियार बेचे है और उनसे खूब सारा पैसा भी कमाया है. लेकिन अब परिस्थिति कुछ ऐसी सामने आई है जिसके मुताबिक फ़्रांस भी अब रूस के नक्शे कदम पर चलने लगा है. भारत के साथ हर तरह की डील साइन करने के लिए फ्रांस काफी ज्यादा उत्सुक हो गया है.

हालांकि भारत ने पिछले कुछ समय से रूस से बहुत कम हथियार व् अन्य चीजे खरीदी है. इस गेप को भरने की कोशिश अब फ्रांस करने लगा है और फ़्रांस ने भारत को सबसे पहले कई रफेल फाइटर जैट बेचे थे और इसके बाद फ्रांस ने भारत को कई सारी मिसाइलें भी दी है. इसके बाद न्यूक्लियर सम्बरीन भी भारत को ऑफ़र की है.

फ़्रांस भारत के साथ मिलकर फूल ट्रांसफॉर्म टेक्नोलॉजी के साथ आम हेलीकॉप्टरों के साथ इंजन विकसित करने के लिए भी तैयार हो गया है. सबसे बड़ी हैरान करने वाली खबर तो ये है कि अब 5 बिलियन डिफेन्स डील को साइन करने के लिए फ्रांस और रूस दोनों एक दुसरे के आमने सामने आकर खड़े हो गये है.

दरअसल भारत को साल 2030 तक सोवियत इराकी अपने T72 टैंक को किसी भी तरह बदलना है. इस समय भारत इस तरह के 2400 टैंको को ऑपरेट कर रहे है जिसमे से कुछ एक ही संचालित किये गये है और ऐसे में भारत को बहुत जल्द 1770 मेन बेटल टैंक की जरूरत थी

जिसके लिए फ्यूचर रेड्डी कॉमबल वीहकल प्रोगाम के तहत मैन बैटल टैंक की जानकारी के लिए अनुरोध किया था.  भारत को एक ऐसा मेन बैटल टैंक चाहिए जो हाई इंटीटयूट रिव्लिंग बॉर्डर, डेजर्टस, आदि चीजो पर आसानी से ऑपरेट कर सके. रूस ने भारत को अपना T14 अर्माटा ऑफ़र किया था जोकि रूस का लेटेस्ट मैंन बैटल टैंक है.

खबरों की माने तो कहा जा रहा था कि भारत रूस का T 14 अर्माटा लेने वाला है लेकिन इसके बाद फ़्रांस की पार्लियामेंट से खबर आई थी कि फ़्रांस की कम्पनी नेक्स्टर भी भारत को अपना लेकलर्क टैंक ऑफ़र करने वाली है. फ़्रांस भारत से एरिया में काफी छोटा है

इसके बावजूद वह 400 लेललर्क टैंक इस्तेमाल करता है. लेकलर्क टैंक 55 टन, 1500 हौर्स पॉवर, 8 सिलेंडर डीजल इंजन से कम है. इनकी स्पीड रोड के उपर 71 किलोमीटर प्रति घंटा है. इसे 3 लोग संचालित करते है जबकि ऑपरेशनल रेंज 550 से लेकर 600 किलोमीटर है. इसके साथ ही नेक्स्टर कम्पनी ने लेक्लर्क टैंक को अपग्रेड करके इसका न्यू टेक्सला वर्जन भी ला दिया है.

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