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रसिया युक्रेन के कारण भारत के 110 सैन्य विमान और 30 नेवी युद्धपोत क्यों खतरे में

रशिया यूक्रेन युद्ध अब भारत के लिए बड़े स्क्योरिटी थ्रेड  के रूप में बरकरार है ! यह तो हम सबको पता है कि भारत के लगभग 60 से 65 फ़ीसदी हथियार या तो रशिया  से परचेज  किए गए हैं या  फिर सोवियत यूनियन के समय परचेज किए गए थे ! यूक्रेन क्योंकि सोवियत यूनियन से ही अलग हुआ है इसलिए ऐसे कई सारे  हथियारों की फैक्ट्री यूक्रेन में भी है जिन्हें  भारत में सोवियत यूनियन के समय परचेज किया था क्योंकि इन कंपनीज ने सोवियत यूनियन के पतन के बाद यूक्रेन में ही रहने का फैसला किया था इसलिए भारत अपने  कई  सारे हथियारों के स्पेयर पार्ट , कंपोनेंट्स यूक्रेन से ही खरीदता ! अपग्रेड  और ओवरहाल के लिए भी यूक्रेन की कई कंपनी के ऊपर निर्भर है !

 

 

 मसला यह खड़ा हो गया है कि रशिया यूक्रेन में जो मिलिट्री ऑपरेशन चला रहा है उसमें वह ना सिर्फ यूक्रेन की मिलिट्री इंस्टॉलेशन के ऊपर स्ट्राइक कर रहा है बल्कि यूक्रेन में स्थित हथियार मैन्युफैक्चरिंग करने वाली फैक्ट्री के ऊपर भी बारबार मिसाइल हमले कर रहा है ! ताकि यूक्रेन की सेना अपने लिए हथियार मैन्युफैक्चर ना कर सके ! रेफरेंस के लिए आपकी स्क्रीन के ऊपर टेलीग्राफ  इंडिया के आर्टिकल का स्क्रीनशॉट है जिसके मुताबिक रशिया यूक्रेन युद्ध ने भारत के लिए मिलिट्री सोर्ससिंग   की नई मुश्किलें खड़ी कर दी है ! खास तौर पर इंडियन एयर फोर्स और इंडियन नेवी  इससे बहुत ही ज्यादा प्रभावित होने वाली है !

 दरअसल भारत में 1984 में उस समय के सोवियत यूनियन से एंटोनोव An – 32  मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदे थे ! इंडियन एयर फोर्स इस तरह के 110 एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल करती है ! यह काफी समय तक इंडियन एयर फोर्स की  बैकबोन भी रह चुके हैं !

 पैराट्रूपिंग ऑपरेशन में इस्तेमाल करने के अलावा लगभग 50 ट्रुप्स को  किसी भी मौसम में दूरदराज के इलाके तक ले  जाना हो या फिर 6 टन कार्गो  को कैरी करना हो या फिर बॉर्डर के बेहद नजदीक किसी रिमोट या छोटी एयरफिल्ड  में अचानक से कोई लैंडिंग करनी हो जहां पर सी 17 ग्लोबमास्टर जैसे हैवी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का पहुंचना मुश्किल हो ! इंडियन एयर फोर्स एंटोनोव An – 32  का बहुत ही हैवली  इस्तेमाल करती है !

 

 

कल को अगर चाइना या पाकिस्तान के साथ युद्ध होता है तो ट्रूप्स और कार्गो की मोमेंट में यह एयरक्राफ्ट बहुत ही क्रुशल रोल प्ले करने वाले हैं लेकिन दिक्कत यह है कि भारत के पास जितने भी एंटोनोव An – 32  मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है वह लगभग 30 से 35 साल से ज्यादा पुराने हैं ! उनमें से कुछ को ऑपरेट कर लिया गया है जबकि कई सारे अपग्रेड करने बाकी है ! भारत यूक्रेन में स्थित एंटोनोव की फैसिलिटी  में  इनको अपग्रेड करने के लिए भेजा करता था ! मगर अब खबर निकल कर रही है कि रशिया  ने यूक्रेन में स्थित एंटोनोव की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के ऊपर कई सारे मिसाइल हमले करके उसको उड़ा दिया है !

 यह तो चलो इंडियन एयर फोर्स की दिक्कत थी इंडियन नेवी भी  रशिया  यूक्रेन युद्ध के कारण इस समय बहुत ही मुश्किल में फंस गई है ! सेम इसी तरह से यूक्रेन की एक और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है जिसका नाम है जोरिया मार्चप्रोक्त ! यह कंपनी इंडियन नेवी के शिप्स के लिए गैस  टरबाइन सप्लाई  करती है ! रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन की इस कंपनी से  खरीदे गए गैस टरबाइन इंडियन नेवी के 1-2 नहीं बल्कि 30 नेविशिप को पॉवर  करते  है और अब यूक्रेन से यह रिपोर्ट निकल कर रही है की रशिया  ने गैस टरबाइन बनाने वाली यूक्रेन की कंपनी जोरिया मार्चप्रोक्त कंपनी  की फैसिलिटी के ऊपर भी कई सारी एयर स्ट्राइक करके उसको तबाह कर दिया है ! इसलिए इस समय इंडियन नेवी भी काफी चिंतित है !

 

 

यहां पर 110  मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के अपग्रेड्स , 30  नेविशिप  के  गैस टरबाइन और कई सारे स्पेयर पार्ट्स और कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनी की बात हो रही है जो भारत क्या किसी भी देश की सेना के लिए छोटामोटा नंबर नहीं होता है ! रशिया  तो एक स्ट्रेटजी के तहत एक एक करके यूक्रेन के डिफेंस इंडस्ट्री की  जितने भी फैक्ट्रीज और फैसिलिटी है उनके ऊपर बमिंग कर रहा है ताकि यूक्रेन के डिफेंस इंडस्ट्री की  बैकबोन ही तोड़ दी जाए ! टारगेट यूक्रेन है लेकिन मुश्किलें भारत के लिए भी खड़ी होंगी

खैर आपको क्या लगता है कि रशिया यूक्रेन को नुकसान पहुंचाने के लिए उनके हथियार निर्माता कंपनीज की  फैक्ट्रीज तबाह और नष्ट करके उनके ऊपर मिसाइल हमले करके ठीक कर रहा है हां या ना नीचे कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं !

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