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मुकेश अंबानी vs रतन टाटा किसके पास ज्यादा पैसा है पर किस्मे हे ज्यादा घमंड

मुकेश अंबानी और रतन टाटा दोनों की अमीरी के चर्चे किसने नहीं सुने मतलब जहां हसबैंड एक फूल का खर्चा नहीं करते वहां मुकेश अंबानी एक नहीं तीन बार अपनी वाइफ को करोड़ों की प्राइवेट जेट गिफ्ट करते है पर प्राइवेट जेट , लग्जरी कार , इंटीरियल के मालिक अंबानी के पास छह कंपनियां है

लेकिन रतन टाटा की बात करें तो यह रहते तो बस एक दूसरे बंगले में है पर इनके पास 135 से ज्यादा कंपनियां है तो अब बताओ सिक्स वर्सेस 135 कंपनीज किसकी जेब भारी होगी ! वैल इसका जवाब शायद ही किसी के पास पर अगर  क्या पता आप खुद ही दे दें ,इसका जवाब और वैसे तो आज एशिया के सबसे अमीर इंसान का टाइटल मुकेश अंबानी के पास है

पर अगर रतन टाटा अपनी पूरी दौलत अपने हाथों में ले ले तो वह भी बन सकते हैं एशिया के सबसे अमीर इंसान आखिर वह ऐसा कर क्यों नहीं रहे तो चलिए आपके सवालों का जवाब जानने के लिए शुरू करते हैं हमारा इन बिजनेसमैन का पैसे और शो ऑफ से भरा यह सफर !

नंबर 1 > ऐसी थी दोनों कंपनी की शुरुआत > चलिए सफर की शुरूआत करते हैं 21 हजार रूपए से शुरू हुई एक टेक्सटाइल कंपनी से जिसका नेटवर्थ आज 5 लाख करोड़ हो गया है लेकिन 21 हजार से लेकर 5 लाख करोड तक का यह सफर आसान नहीं था क्योंकि 1839 में जमशेद जी टाटा का स्ट्रगल 14 साल की उम्र में ही मुंबई से ही शुरू हुआ था

जहां से ग्रेजुएशन खत्म होते होते ही उन पर परिवार की जिम्मेदारियां आ गई जिन्हें पूरा करने के लिए उन्होंने 21 हजार रूपए जोड़ कर पूरा शुरू किया टेक्सटाइल की ट्रेडिंग का काम कर फिर जैसे ही धंधों में पांव जम गए वैसे ही जमशेद जी ने नागपुर में अपनी पहली टेक्सटाइल मिल शुरू की जहां पर लक्ष्मी जी की कृपा ऐसी बरसी कि उन्हें धंधे में काफी प्रॉफिट हो गया !

बस इसी प्रॉफिट को देख उनका मन 3 ऐसे बड़े प्रोजेक्ट को शुरू करने का हुआ जिनका फायदा सिर्फ उनको ही नहीं बल्कि उनके देश के सभी लोगों को मिल सके हालांकि वह इस सपने को पूरा होता देख नहीं पाए थे लेकिन अपने पिता के ही नक्शे कदम पर चलते हुए जमशेद जी के बेटे दोराब जी टाटा ने पिता के आयरन एंड स्टील कंपनी और हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर को स्टेवलिश कर उनका सपना पूरा किया

और साथ ही इंडिया में शुरू किया पहला इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस लेकिन दोस्तों इसे वक्त का सितम कह लो या उम्र का एक पड़ाव जल्दी इनका भी देहांत हो गया ! इसके बाद 1938 में टाटा ग्रुप की जिम्मेवारी जहांगीर दादाभाई टाटा ने ली जहां उन्होंने 14 कंपनियों को चलाते हुए टाटा ग्रुप की कंपनियों का आंकड़ा 95 कंपनीस कर दिया

और इतना ही नहीं इसके साथ ही जेआरडी टाटा ने इंडिया की पहली एयरलाइंस टाटा एयर लाइनस की भी शुरुआत की जिसके बाद उसे गवर्नमेंट ने अपने अंडर लेते हुए उसका नाम एयर इंडिया कर दिया पर इन सब के बाद तीन पीढ़ियों के नाम और काम को आगे बढ़ाने की जिम्मेवारी मिली रतन नवल टाटा को जिन्होंने उसे बखूबी निभाते हुए टाटा कंपनी का नाम आज ऐसा फेमस कर दिया है

कि बच्चा बच्चा टाटा के बारे में जानता है और टाटा के साथ काम जरूर करना चाहता है तभी तो कंपनी का नेटवर्थ आज 5 लाख करोड़ तक पहुंच जा चुका है , और अब बात करते हैं उस इंसान की जिसकी एक गाड़ी की कीमत में नॉर्मल इंसान एक बंगला बना देता है और इतना ही नहीं इन्होंने 6th फ्लोर की

जो बड़ी पार्किंग अपने घर में बनाई है ना इतनी बड़ी बड़ी बिल्डिंग में आधे से ज्यादा मुंबई की पापुलेशन रहती है ! यहां आपका गैस बिल्कुल सही है मैं बात कर रहा हूं अंबानी की जिनके हाथ में कोई सोने का कटोरा नहीं था और हमारे ही पापा की तरह धीरूभाई अंबानी ने भी कड़ी मेहनत और सैलरी में मिलने वाले सिल्वर कॉइन को जमा कर कर के अपने बिजनेस को शुरू किया था !

मतलब की पैसे जमा होने पर वह विदेश की नौकरी को छोड़ कर मुंबई की एक चॉल में रहने आ गए और जैसे तैसे बहुत संघर्ष और मेहनत के बाद धीरूभाई अंबानी ने रिलायंस कमर्शियल कॉरपोरेशन को शुरू किया जो मसालों और यान में ट्रेड करता था और जैसे ही मसालों और यान के धंधे में वह सेट हो गए वैसे ही उन्होंने विमल नाम से अपने कपड़ों का बिजनेस भी शुरू कर दिया

पर विमल लोगों को लुभाने में फेल हुआ इसलिए उसको कस्टमर का अच्छा रिस्पांस नहीं मिला जिसके बाद उसके स्टॉक में लोगों से इन्वेस्ट करवाने और उसके स्टॉक को बेचने का काम भी खुद धीरूभाई अंबानी को करना पड़ा , लेकिन अपने आप में यह काफी बड़ी बात है जिस टाइम लोग अपने में इन्वेस्ट जानते नहीं थे

उस टाइम धीरूभाई अंबानी ने विमल के आईपीओ में लोगों से इन्वेस्ट करवाया था और ऐसी इन्वेस्ट करवाई थी जिसका फायदा कंपनी और इन्वेस्टर दोनों को भरपूर हुआ और कुछ ही सालों में 70 करोड के रेवेन्यू वाले रिलायंस का रेवेन्यू 2002 में 75 हजार करोड हो गया था !

इस रेवेन्यू और बिजनेस में मिल रहे सक्सेस के चलते रिलायंस इंडस्ट्री का नाम फॉर्च्यून 500 में शामिल हो गया लेकिन शायद धीरुभाई के हिस्से में इतनी ही सक्सेस थी इसीलिए तो उसी साल खराब तबीयत की वजह से उनकी डेथ हो गई

और उनकी मौत के बाद उनके पूरे बिजनेस को उनके दो बेटे मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के बीच डिवाइड कर दिया गया पर दोनों भाइयों के बिजनेस का तरीका काफी अलग था इसलिए जहां एक भाई कोर्ट में खुद गवाही दे रहा है कि उसकी नेटवर्थ जीरो हो गई है वहीं मुकेश अंबानी का नेटवर्थ 7930 करोड़ डॉलर हो गया है !

चलिए अब बात करते हैं इनके आज की यानी कि दोनों के पैसों की क्योंकि यह सारी लड़ाई उसी की तो है क्या आप जानते हैं 88 मिलियन के नेटवर्थ वाले मुकेश अंबानी रिलायंस रिटेल , रिलायंस पेट्रोलियम और रिलायंस जिओ जैसी कई कंपनीज के मालिक है परंतु वही 135 से ज्यादा कंपनी के सब्सिड्रीज होते हुए भी रतन टाटा का नेटवर्थ हमेशा अंबानी से कम रहा है

और कभी कागजों पर दिखाई भी नहीं दिया है पर आखिर क्यों तो आइए जानते हैं ! वेल यह हम सभी को पता है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज फिलहाल लिमिटेड सेक्टर में ही काम कर रही है लेकिन टाटा ग्रुप इंडिया के ऑलमोस्ट हर फील्ड में काम कर रहा है जैसे स्टील , केमिकल , आईटी , ऑटोमोबाइल वगैरा-वगैरा तभी तो सब्सिड्रीज कंपनी की ज्यादा होने की वजह से टाटा ग्रुप का मार्केट कैपिटल मोस्ट ऑफ द टाइम रिलायंस ग्रुप से ज्यादा ही रहता है

फिर भी मुकेश अंबानी का नेटवर्थ आज इंडिया में सबसे ज्यादा कैसे हैं यही जानना चाहते हैं ना आप तो आपके इस सवाल को खत्म करते हुए मैं बताता हूं मुकेश अंबानी का नेटवर्थ इसलिए ज्यादा है क्योंकि रिलायंस ग्रुप में वह 48% शेयर के मालिक है और लगभग जब शेयर ही आधे उनके नाम पर है तो जाहिर सी बात है कंपनी का फायदा होने पर आधी वैल्यू ही बढ़ती है

इसीलिए तो सितंबर 2020 में अंबानी साहब का नेटवर्थ 88 बिलियन डॉलर हो गया था लेकिन वही अगर हम बात करें रतन टाटा की तो टाटा ग्रुप में वह 1% से कम शेयर के मालिक है क्योंकि उनके ग्रुप का 66% शेयर उनकी ही कंपनी के अलग-अलग ट्रस्ट जैसे सर रतन टाटा ट्रस्ट , सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट , टाटा एजुकेशन एंड 𝚍𝚎𝚟𝚕𝚎𝚙𝚖𝚎𝚗𝚝 ट्रस्ट जैसे कई ट्रस्ट को डोनेट किया जाता है जो इंडिया के एजुकेशन , हेल्थ और आर्ट एंड कल्चर जैसे अलग-अलग सेक्टर में काम कर रहे हैं !

मतलब बंदे को पूरी 134 कंपनीज मिली थी अपने नाम करने के लिए लेकिन फैमिली वैल्यू को आगे बढ़ाते हुए लेकिन वो कंपनी का टू थर्ड से भी ज्यादा हिस्सा देशवासियों के लिए दान कर रहे हैं इसका मतलब समझ रहे हैं आप इसका मतलब अगर सिर्फ और सिर्फ चैरिटी वाले शेयर भी रतन टाटा ने अपने नाम कर लिए होते ना तो

वह शायद वो ना सिर्फ इंडिया बल्कि पूरे एशिया के सबसे अमीर आदमी होते लेकिन दोस्तों कहीं इसका यह मतलब तो नहीं कि मुकेश अंबानी सिर्फ पेपर पर अमीर है बल्कि जेनुअन पैसा रतन टाटा के पास है यह तो सोचने वाली बात है !

घर गाड़ी पैसा सब है इन दोनों के पास लेकिन क्यों दिखते हैं एक के खर्चे तो वही दूसरे के कम होते हैं चर्चे क्योंकि पैसा तो बोलता है बहुत , लेकिन जिसको दिखावा करना आता है उसका ही ज्यादा बोलता है तभी तो अंबानी ने जब अपनी बेटी की शादी में 110 करोड़ खर्च किए थे तब उसके चर्चे बड़े जोरों शोरों से हुए थे और तो और जैसे कि मैंने आपको इंट्रो में ही बताया था

कि मुकेश अंबानी ने अपनी वाइफ नीता अंबानी को तीन बार 1000 स्क्वायर फिट का प्राइवेट जेट गिफ्ट किया है जिसकी कीमत करोड़ों में होती है पर चौंकिए मत क्योंकि इनके खर्चे अभी खत्म नहीं हुए हैं इनकी पास एक यार्ट भी है जो सोलर ग्लास रूफ से बनाई गई है और जिसकी एप्रॉक्स कीमत 700 करोड़ है और जब पति इतने खर्चे कर ही रहा है

तो बीवी क्यों पीछे रहे इसीलिए तो अनीता अंबानी को हमेशा नए डिजाइनर कपड़े , ब्रांडेड वॉचेस और महंगे बैग के साथ ही देखा जाता है और देखो भाई जब सेठ इंडिया का सबसे अमीर आदमी हो तो उसके नौकर भी को भी तो उनके स्टैंडर्ड का होना पड़ेगा इसीलिए मुकेश अंबानी अपने सिक्योरिटी गार्ड को भी 2 से 3 करोड़ वाली मर्सिडीज𝙰𝙼𝙶 𝙶63𝚜 में अपने साथ लेकर घूमते हैं

और तो और अपने एंटीरियर में गर्मियों में स्नोफॉल का मजा लेने के लिए उन्होंने उसके लिए अलग से स्नोरूम तक बनवाया है लेकिन अगर वही हम रतन टाटा के खर्चों की बात करें तो उनकी एडोलॉजी हमेशा सिंपल लिविंग की तरह रही है इसीलिए तो उन्होंने आज तक कोई बड़ा खर्चा नहीं करते हुए अपना घर भी काफी सिंपल रखा है

साथ ही अपने पैसों को स्टार्टअप में इन्वेस्ट किया है ताकि उनकी कंट्री और कंट्री के लोग दोनों आगे बढ़ सके फिर इसके अलावा उनका टाटा हेल्थ केयर खुद को एक्सपेंड करते हुए अब इंडिया के 25 स्टेटस और यूनियन 𝚝𝚎𝚛𝚛𝚒𝚝𝚘𝚛𝚒𝚎𝚜 में फैल गया है और अब तो टाटा ग्रुप अपनी कंपनी की तरह सोशल वर्क के हर फील्ड में अपने पैर पसारने लग गए है

फिर चाहे वह वाटर एंड सैनिटेशन हो , या सपोर्ट या फिर डिजास्टर मैनेजमेंट एंड माइग्रेशन या सोशल जस्टिस ही क्यों ना हो पर जिस तरह से टाटा ग्रुप लोगों के लिए बिना किसी पब्लिसिटी के लोगों के लिए काम कर रहा है उससे तो यह साफ दिख रहा है कि इनकी वैल्यू और थिंग्स इनके लिए कितने इंपॉर्टेंट है क्योंकि एक बिजनेसमैन जहां एक गुलाब भी खरीद लेता है

तो उसकी हवा उड़ने लगती है मतलब उसकी न्यूज़ बन जाती है वहीं दूसरा बिजनेसमैन ऐसा है जिसके पास किसी भी चीज की कमी नहीं है लेकिन फिर भी वह सोशल वर्क में इतने आगे पहुंच गए हैं जिसका शायद किसी को पता ही नहीं है और इसकी वजह है उनका यह सब काम छुप-छुपकर करना !

पर अब आप ही बताइए इन दोनों बिजनेसमैन ने एक जैसी मेहनत कर अपने आप को अपनी कंपनी को इतने आगे पहुंचाया लेकिन फिर भी एक इंसान दुनिया की नजरों से खुद को बचाते हुए सारे काम कर रहा है तो वही दूसरे का छोटे से छोटा खर्चा भी लाइमलाइट में आ जाता है !

तो ऐसे में क्या अपने खर्चे का चर्चा करना वाकई में जरूरी है ? क्या लगता है आपको कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं ! इसके साथ ही अगर आपको आज की हमारी वीडियो अच्छी लगी हो तो इसे लाइक और शेयर करना ना भूलना और साथ ही ऐसे नए पुराने चर्चे के बारे में ज्ञान अर्जित करने के लिए हमारे पेज को भी फॉलो कर देना ताकि हमारी कोई भी अपडेट आपसे मिस ना हो फिर मिलेंगे किसी नए मुद्दे और चर्चे के साथ ! जय हिंद !

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