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भारत में अमेरिका का सबसे बड़ा निवेश, तमिलनाडु में फर्स्ट सोलर सुविधा के लिए दिए 500 मिलियन डॉलर

दुनिया के 70 % सोलर इंडस्ट्री पर चाइनीज बाजारों ने कब्जा किया हुआ है और चाइना जिन देशो को सोलर बेचता है उसमे भारत भी शामिल है. अब चीन की इसी निर्भरता को खत्म करने के लिए भारत ने मेक इन इंडिया मिशन चलाया है और इसके बाद दुनिया की कई बड़ी कम्पनियों ने भारत में निवेश भी किया है.

इसमें से एक कम्पनी का नाम फर्स्ट सोलर है और ये US बेस्ड कम्पनी है. इसमें काफी समय पहले जानकारी दी थी कि वह भारत में अपनी नई सोलर मोड्युल मेनिफेचरिंग केपेसिटी को इंस्टाल करेगी. अब US इन्टरनेशनल डेवेलपमेंट कॉर्पोरेशन बैंक की तरफ से लगभग 684 मिलियन डोलर की लागत से अब

ये कम्पनी तमिलनाडु के अंदर 3.3 गेगावाट की सोलर मॉडल मेनिफेचरिंग फेसिलिटी को डेवेलपमेंट करेगी. इसके लिए अमेरिकी सरकार द्वारा फंडिंग दे गयी है. ये कम्पनी 2022 में काम शुरू करने वाली है और 2023 के आधे में सोलर मोड्यूल मेनिफेचरिंग भी भारत के अंदर शुरू हो जाएगी.

ये कम्पनी भारत के अंदर बड़े पैमाने पर सोलर मेनिफेचरिंग करेंगी और इसमें लोगो को रोजगार मिलेगा और देश कहीं ण कहीं आत्मनिर्भर भी बनेगा. जहाँ पर एक तरफ देश की खपत को पूरा किया जायेगा और वहीँ इसके साथ में ये सोलर मोड्यूल दुनिया के अलग अलग देश में एक्सपोर्ट भी होंगे. जिनमे हम मेड इन इंडिया का टैग देख पाएंगे.

इसके साथ में PM मोदी के 500 गेगावाट की रिनुव्ल एनर्जी की क्षमता को इंस्टाल करने का ये भी ये एक प्रमुख हिस्सा बनने वाला है. कम्पनी 2023 तक 3.3 गेगावाट की घरेलू क्षमता को बढ़ाएगी और इसी के साथ कपनी ने कहा है कि वह 2024 तक वैश्विक निर्माण में लगभग 16 गेगावाट तक पहुंचाने की उम्मीद में लगे हुए है

जिसके लिए वे अब US सहित और भी अन्य देशो से लोंन लेंगे. ये भारत के अंदर 2.5 गुना कार्बन के उत्सर्जन को कम करने के उपर काम किया जा रहा है. फिलहाल एक लम्बे समय के बाद फैसला लिया गया है कि तमिलनाडु में सोलर मेनिफेचरिंग फेसिलिटी डेवेलपमेंट करनी है.

CEEW की स्टडी के मुताबिक़ 2070 में इलेक्ट्रिक या फिर बैटरी से चलने वाले सभी वाहनों में देश में बिकने वाली सभी कारो का 84 % हिस्सा होगा. इसके साथ ही ट्रको में से 79% बैटरी इलेक्ट्रिक तकनीक पर चलेंगी और अन्य हाइड्रोजन पर चलेंगे.

देश भर के परिवारों को भी खाना बनाने के लिए प्राथमिक इंधन के रूप में बिजली का प्रयोग करना होगा. भारत के बिजली उत्पादन में पवन और परमाणु ऊर्जा का हिस्सा 1792 GW और 225 गेगावाट तक बढाना होगा.

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