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भारतीय रेलवे ने खाली पड़ी जमीन पर लगाये करोड़ो सोलर पैनल

भारतीय रेलवे ने ये दावा किया है कि वे 2030 तक रेलवे से 1% का भी कार्बन इमीग्रेशन नही करने वाले है और इसी बड़े कदम के बाद भारतीय रेलवे दुनिया का पहला शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला रेलवे सिस्टम बन जायेगा. ये इतिहास में एक नई पहचान देने के साथ साथ भारतीय रेलवे ने कौन कौन से बड़े कदम उठाएं है इसके बारे में आपको जानकारी होना आवश्यक है.

भारतीय रेलवे के पास 51 हजार हेक्टेयर खाली जमीन पड़ी हुई है और अब भारतीय रेलवे इस पूरी जमीन पर सोलर पैनल को इनस्टॉल करने वाली है. लेकिन यहाँ पर किसी भी तरह का खर्चा रेलवे नही उठाने वाली है

क्योंकि ये सारा काम प्राइवेट कम्पनियों के द्वारा व्यवस्थित किया जायेगा. या फिर PPE के तौर पर यहाँ पर काम शुरू होगा जिसके लिए रेलवे 10 या 15 साल के समय के लिए एक एग्रीमेंट पर साइन करेगी. इस प्रोजेक्ट के लिए रेलवे का सबसे अहम हिस्सा रेलवे ने अपने सभी अधिकारियों को लगा दिया है

कि जितनी भी रेलवे की जमीन है उसको आई देंटी फाई किया जाए और फिर उन्हें प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन को सौंप दिया जाए. ये सभी निर्देश जोर्नल रेलवे के द्वारा जारी किये गये है. भारतीय रेलवे ने पहले से ही 3 पायलेट परियोजनाएं शुरू कर दी है इसमें पहली छतीसगढ़ के भिलाई में खाली जमीन पर 50 मेगावाट की सोलर क्षमता इनस्टॉल की गयी है.

हरियाणा के दीवाना में 2 मेगावाट की सोलर  क्षमता है और 1.7 सोलर क्षमता मध्य प्रदेश के वीणा में तैयार की गयी है जिसको साल 2020 में पूरा कर लिया गया था लेकिन रेलवे की 51 हजार हेक्टेयर की जमीन को 3 चरणों में पूरा किया जायेगा और इस पुरे परियोजना में 3 गेगावाट के सोलर परियोजनाएं इनस्टॉल की जाएगी.

इसमें पहले चरण के अंदर 1.6 गेगावाट की क्षमता का सर्जन किया जायेगा इसके साथ में दुसरे चरण में 0.4 गेगावाट और तीसरे चरण में 1 गेगावाट की क्षमता इनस्टॉल की जाएगी. लेकिन आखिर के बचे 1 गेगावाट को केवल पटरियों के किनारे में इंस्टाल किया जायेगा जिससे हम ट्रैक सेफ्टी को ध्यान में रख पाएंगे और साथ में हमे पॉवर भी मिलेगी.

पिछले 2 सालों में भारतीय रेलवे के द्वारा 300 से अधिक रेलवे स्टेशन को इलेक्ट्रिक फाई किया गया है यानि कुछ जगहों पर डीजल जेनरेटर का इस्तेमाल किया जाता है. और आज उनको इलेक्ट्री सिटी से ऑपरेट किया जा रहा है. भारतीय रेलवे के इस बड़े फैसले के बाद भारतीय रेलवे भी दुनिया के सबसे बड़े और अलग प्रोजेक्ट्स में गिने जायेंगे. जहाँ सोलर पैनल सेट सीधा इलेक्ट्रिक टेक्शन में कुछ सर्कट का प्रयोग करके सप्लाई दी जाएगी.

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