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बुलेटप्रूफ जैकेट में गोली क्यों नहीं लगती जानिए असली वजह

बुलेटप्रूफ जैकेट के बारे में तो आप सभी को पता ही होगा यह हमारे देश के सोल्जर और जवानों के लिए सबसे एहम हथियार है क्योंकि बुलेटप्रूफ जैकेट की खास बात यह होती है की इस में से गोली पार नहीं होती लेकिन कभी आपने यह सोचा है की मामूली से दिखने बाले इस बुलेटप्रूफ जैकेट में ऐसा क्या है जो सनसनाती तेज रफ्तार से आती बुलेट को भी रोक देता है

और इसे पहने हुए व्यक्ति को कम से कम डेमेज होता है ! आज के इस एपिसोड में हम बात करेंगे बुलेटप्रूफ जैकेट के बारे में और जानेगे की बुलेटप्रूफ जैकेट किस तरीके से काम करता है और इसे कैसे बनाया जाता है ? बुलेटप्रूफ जैकेट का इतिहास क्या है और एक बुलेटप्रूफ जैकेट की कीमत कितनी है ?

और अगर आपको भी बुलेटप्रूफ जैकेट खरीदना है तो इंडिया में आप इसे कैसे खरीद सकते हो ? लेकिन आपसे एक रिक्वेस्ट है की आप इस विडोयो को एक लाइक जरूर करें ! तो दोस्तों बुलेटप्रूफ जैकेट को समझने में हमें थोड़ा सा इतिहास में पीछे जाना होगा तो शुरुआत में इंसान घायल होने और हमलों से बचने के लिए जानवरों की मोटी चमड़ी का इस्तेमाल करते थे

जैसे जैसे एडवांस हथियार आने लगे वैसे वैसे सुरक्षा के साधन में भी बदलाव होता गया फिर मनुष्य लकड़ी और धातु से बने कवच का इस्तेमाल हमलों से बचने के लिए करने लगे सब से पहले बुलेटप्रूफ जैकेट का आइडिया पंद्रहवी सदी में आया उस समय धातुओं की कई परत का इस्तेमाल करके कवच बनाया जाता था

गोली कवच को पार नहीं कर सकती थी बल्कि उससे टकराकर अपनी दिशा ही बदल लेती थी इस जैकेट पहने इंसान में गोली का कोई असर नहीं होता था लेकिन वे कवच इतने ज्यादा भारी होते थे की इसे पहने हुए व्यक्ति काफी तेजी से भाग नहीं सकते थे , फिर 18 वीं सदी में जापान में सिल्क से कवच बनाया गया वे कवच असरदार तो थे

फिर दूसरे विश्व युद्ध के दौरान फ्लैक जैकेट का आविष्कार हुआ और इसमें बैलिस्टिक नायलोन फाइबर का इस्तेमाल किया गया और यह जैकेट उस समय बंदूक से बचने के लिए काफी था लेकिन समय के साथ हथियार और भी एडवांस होते गए और उस समय की गोली इस जैकेट को आराम से भेद देता था फिर 1960 में बड़े बड़े टायर बनाने के लिए केवलर नाम का एक फाइवर को खोजा गया

लेकिन यह फाइवर अनुमान से काफी ज्यादा मजबूत निकला और फाइवर बजन में हल्का होता है लेकिन काफी मजबूत होता है अपने समान बजन के स्टील से लगभग पांच गुना ज्यादा मजबूत और आजकल के समय में इसी केवलर फाइवर को उपयोग करके बुलेटप्रूफ जैकेट को तैयार किया जाता है !

अब आइये जानते है की बुलेटप्रूफ जैकेट कैसे बनता है ? दरअसल बुलेटप्रूफ जैकेट में दो लेयर होते है सबसे ऊपरी लेयर को सेरेमिक लेयर कहते है और दूसरी लेयर को बैलिस्टिक लेयर कहते है जो अक्सर अंदर की ओर लगाया जाता है और इन दोनों लेयरों को मिलाकर एक बुलेटप्रूफ जैकेट को तैयार किया जाता है

दरअसल केवलर जो है न वो एक तरह का प्लास्टिक ही है और इस फाइवर का सबसे पहले एक महीन धागे बाला रील तैयार कर लिया जाता है फिर उस धागे से बैलिस्टिक शीट यानी बैलिस्टिक चादर की कई परतें तैयार की जाती है फिर उस बैलिस्टिक शीट को कई परतों में जोड़ा जाता है और अंत में केवलर बैलिस्टिक पेनल को जैकेट में जरूरत के हिसाब से आगे और पीछे लगा दिया जाता है

इस केवल फाइबर की खास बात यह है की जब इस पर कोई बुलेट टकराता है तो यह बुलेट की सारी ऊर्जा को सोख लेता है और ऊर्जा को पूरे सरफेस में फैला देता है ! अब आइये जानते है कैसे काम करती है बुलेटप्रूफ जैकेट ! तो जब गोली बुलेटप्रूफ जैकेट से तटकराती है तो यह सबसे पहले सेरेमिक लेयर से टकराती है

और यह सेरेमिक लेयर बेहद मजबूत होता है जिससे बुलेट का नुकीला हिस्सा टूट जाता है और वो छोटे छोटे टुकड़ों में बिखर जाता है जिससे गोली की रफ्तार और भेदने की क्षमता कम हो जाती है और जैकेट पहने हुए इंसान के शरीर के सम्पर्क में नहीं आ पता जब गोली सेरेमिक लेयर से टकरा जाती है

तब वो टुकड़ों में बिखर जाती है तो उससे निकलने बाली बड़ी मात्रा में ऊर्जा को बैलिस्टिक प्लेट के दूसरी परत अवशोषित करती है इससे बुलेटप्रूफ जैकेट पहने इंसान को कम नुक्सान पहुँचता है लेकिन अगर आपने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखा है और आपको इस पर गोली लगती है तो आप को ऐसा लगेगा कि आपको किसी ने जोर से कस के मारा हो और आप धक्के से पीछे भी गिर सकते है !

अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा की इंडिया में एक बुलेटप्रूफ जैकेट की कीमत क्या है तो दोस्तों बुलेटप्रूफ जैकेट की कीमत उसकी क्वॉलिटी और लेवल पर निर्भर करता है इसकी प्राइज 45 हजार से लेकर ढाई लाख होता है 

 

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