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अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के खिलाफ भारत का मास्टर स्ट्रोक काम आया

यूनाईटेड नेशन सिक्योरिटी कौंसल में भारतीय मसले के उपर अमेरिका, ब्रिटेन फ्रांस के खिलाफ भी चला गया था और ये तीनो ही देश जो UAE सिक्योरिटी कौन्सिउल के परमानेंट मेम्बर है ये सभी मिलकर UN सिक्योरिटी कौंसल में चीन के खिलाफ भारत को लगातार बहुत ही अग्रेसिव तरीके से पीछे करते आ रहे है.

ऐसे में भारत इनके खिलाफ जाए या फिर इनसे सहमत न हो ये बहुत कम देखा जाता है. लेकिन भारत ने जिस रीजन से इन तीनो देशो के खिलाफ जाना शुरू किया था उसके परिणाम अब भारत को मिल गये है. भारत के पड़ोसी देश मयन्मार में साल 2021 के शुरुआत में ही म्यांमार आर्मी ने सैन्य तख्ता पलट करके मिलिट्री रूल ला लिया था

जिसके बाद से ही अमेरिका, बिर्टेन और फ़्रांस जो अपने आपको दुनियाभर में डेमोक्रेटिक वैल्यू और डेमोक्रेसी का डिफेंडर मानते है इन्होने मयंमार के उपर कई तरह के सेंग्शन थोपने का फैसला किया था. ताकि मयन्मार आर्मी को फिर से डेमोक्रेसी इनस्टॉल करने के लिए मजबूर किया जा सके.

भारत उस समय इसके खिलाफ खड़ा हो गया था और उसने कहा था कि मयन्मार के उपर सेंग्शन थोपना एक सही कदम नही है इससे म्यांमार के हालात और ज्यादा खराब होंगे. और म्यामांर की आम जनता को सेंग्शन के प्रभाव भी झेलने पड़ेंगे. इसके बाद जून महीने में यूनाईटेड जनरल असेम्बली ने म्यामांर आर्मी के खिलाफ एक संकल्प किया है

जिसके तहत म्यामांर आर्मी को जल्द से जल्द डेमोक्रेसी रीइनस्टॉल करने के लिए कहा गया. बाकी देशो से आग्रह किया गया कि वे म्यामांर आर्मी को कोई भी हथियार न बेचे. चीन रूस बांग्लादेश नेपाल के साथ मिलकर भारत ने म्यामांर आर्मी के खिलाफ वोट नही किया था.

भारत का स्टैंड बिलकुल क्लियर था कि हम म्यामांर आर्मी के उपर जोर जबरदस्ती बिलकुल नही करेंगे. इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण ये है कि भारत की जितनी भी नार्थ ईस्ट स्टेट का आउटल इन्टरनेशनल बॉर्डर म्यामांर से लगता है उनके उपर कई सारे इनसर्जन ग्रुप एक्टिव है जो भारत के अंदर हमले करके म्यामांर बॉर्डर पार करके म्यामांर की ट्रोयती में जाकर वहां पर छिप जाते है.

इनके उपर कार्यवाही करने के लिए भारतीय आर्मी पूरी तरह से म्यामांर आर्मी पर निर्भर है और पिछले कुछ सालो में ऐसे इनसर्जन ग्रुप जो भारत पर हमला करके म्यामांर में छिपने चले जाते है उनके उपर म्यामांर आर्मी ने कार्यवाही करके भारत की काफी मदद की है. दोनों देशो की आर्मी ने मिलकर कई सारे ऐसे ऑपरेशन किये है जिसके बाद नार्थ ईस्ट के राज्यों में काफी समय तक परिस्थिति नियन्त्रण में रही है.

ऐसे में अगर भारत म्यामांर आर्मी के खिलाफ जाता है तो ये उल्टा भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है. क्योंकि इस केस में म्यामांर भारत का साथ नही देगा और वहीँ म्यामांर आर्मी चीन की तरफ अपना हाथ बढाने लग जाएगी.

इसलिए ब्रिटेन, फ़्रांस और अमेरिका के पीछे भारत का जाने का उद्देश्य एक बार फिर से पूरा हो गया है. यानि म्यामांर आर्मी ने भारत को खुलकर सपोर्ट किया है. म्यामांर आर्मी ने जिन 5 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था उन्हें भारत को सौंप दिया है.

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